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शब्दम् ने किया शिक्षक का सम्मान

शिकोहाबाद शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में साहित्य संगीत और कला को समर्पित शब्दम् संस्था ने संस्कृति भवन सभागार में कृपाशंकर शर्मा ‘शूल’ यंग स्काॅलर्स एकेडमी, सतीश कुमार यादव समर्थ पूर्व प्रधानाध्यापक पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिरथुआ मैनपुरी, नरेश सिंह चैहान प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय सूरजपुर रुधैनी को शिक्षा में विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों को राशि, वैजयंती माला, नारियल, हरित कलश, शाॅल, सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया।
शब्दम् अध्यक्ष व उद्योगपति किरण बजाज ने कहा कि आदि काल से शिक्षक और गुरुओं का महत्व भारत में विशेष रहा है। अच्छा शिक्षक शिष्य के जीवन को ज्ञान के माध्यम से तराशता है। जीवन जीने की कला सिखाता है।शिक्षण के साथ साथ चरित्र निर्माण करता है। सम्मान समारोह में सामाजिक उत्तरदायित्व में शिक्षक की भूमिका विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई। नरेश सिंह चैहान ने अपने कहा कि अपने विद्यालय में विभिन्न सुविधाएं जुटाई उसमें समाज का बहुत बड़ा योगदान है। अगर समाज के लोग अपने उत्तरदायित्व को नहीं निभाते तो सरकारी स्कूल में सुविधाएं जुटाना और शैक्षिक विधियों में नये-नये प्रयोग करना सम्भव नहीं था। इसलिए शिक्षा में शिक्षक और समाज का एक दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व बहुत बड़ा है। प्रारम्भ में मुझे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन बाद में मैंने समाज के सहयोग से अपने विद्यालय को आदर्श विद्यालय बनाने में सफलता प्राप्त की।
सतीश कुमार यादव समर्थ ने श्लोकों के जरिए बताया कि शिक्षा देना और प्राप्त करना सर्वाधिक पुण्य का काम है। देश के निर्माण में शिक्षा का सबसे बड़ा महत्व है। यदि देश को आगे बढ़ाना है तो हमें सर्वाधिक ध्यान शिक्षा पर ही देना पड़ेगा। एनसीईआरटी नई दिल्ली में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। मुझे हिंदी अकादमी दिल्ली ने भी बुलाया। इन प्रशिक्षणों से विद्यालय को बहुत लाभ हुआ और समाज में विद्यालय के माध्यम से नई चेतना जागृत हुई। बच्चा उपदेश देने से नहीं सीखता, वह मां बाप और शिक्षक के आचरण से सीखता है। जैसा आचरण इनका होगा वैसे ही बच्चे का निमार्ण होगा और दूसरे शब्दों में कहे तो वैसा ही हमारे समाज का निर्माण होगा।
कृपाशंकर शर्मा शूल ने कहा कि समाज परिवार की इकाई से बनता है। शिक्षा में शिक्षक और मां बाप का सामाजिक उत्तरदायित्व छोटे बच्चे की लालन-पालन से शुरू होता है। माता बच्चे की प्रथम गुरु होती है। यदि मां बाप अच्छे संस्कार देंगे तो वह अच्छी शिक्षा प्राप्त करेगा। इस तरह सभी परिवारों की इकाइयां मिलकर समाज को सशक्त बनाएंगी।शिक्षक समाज को राह दिखाता है। विद्यालय में साधानों की व्यवस्था करना सरकार के साथ समाज का भी उत्तरदायित्व है।शिक्षक इसके लिए समाज को प्रेरित करता है। शिक्षक अच्छी शिक्षा देकर श्रेष्ठ समाज का निर्माण करता है। यदि शिक्षक अपने छात्र-छात्राओं को संतान की तरह स्नेह देगा तो समाज में उनका बहुत सम्मान होगा।
कार्यक्रम का संचालन अरविन्द तिवारी ने किया। मंजर उलवासै ने परिचय, धन्यवाद डाॅ. महेश आलोक ने दिया। इस दौरान उत्तम सिंह उत्तम, आर.के. बंसल, विनीत बसंत, आलोक
अर्श, धमेन्द्र उपाध्याय, एन.पी. यादव, आचार्य शिव रतन सिंह, विनीत बसंत, शशी प्रभा, सत्यदेव पाण्डेय, पारूल राना, डाॅ. मंजुला सिंह, कल्पना यादव, श्रद्धा श्रीवास्तव, मंन्जुलता दिनेश चन्द्र उपाध्याय, एम.एस. चौहान, प्रवीन पवार, विवेक चौहान सहित अनेक शिक्षकगण मौजूद रहे।

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