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किसानों व मजदूरों की समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन पत्र दिया।

किसानों एवं कृषि मजदूरों के लिए संपूर्ण ॠण माफी योजना लागू की मांग की है :- किसान नेता विशेष यादव प्रमुख प्रदेश महासचिव अखिल भारतीय किसान यूनियन


फ़िरोज़ाबाद / टूंडला – माननीय प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार दिल्ली।
द्वारा उपजिलाधिकारी अनुराधा सिंह टुण्डला जनपद फिरोजाबाद,में किसान, मजदूर की समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन पत्र दिया।

किसानों, कृषि मजदूरों एवं ग्रामीण भारत के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मांगो से अवगत कराने हेतु, अखिल भारतीय किसान यूनियन निम्नलिखित प्रमुख मांगों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहती है ।
सभी फसलों के लिए स्वामीनाथन आयोग की संस्तुति अनुसार डैच् (सी2$50) पर कानूनी गारंटी एवं सरकारी खरीद कानून बनाया जाए। केन्द्र सरकार के द्वारा 2025-26 में गन्ने को लेकर घोषित की गयी एफआरपी को बढ़ाने के साथ-साथ देशभर में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए तथा सभी लंबित भुगतान ब्याज सहित तत्काल कराया जाए , किसानों एवं कृषि मजदूरों के लिए संपूर्ण ऋण माफी योजना लागू की जाए तथा ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराया जाए। देशभर में कृषि हेतु मुफ्त बिजली व घरेलू एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को देशभर में 300 युनिट मुफ्त बिजली दी जाए साथ ही अतिरिक्त बोझ डालने वाले बिजली बिल 2025, स्मार्ट मीटर व्यवस्था एवं बिजली निजीकरण की प्रक्रिया वापस ली जाए।
किसानों और मजदूरों के हितों के विरुद्ध बनाए गए चारों श्रम संहिताएं, बीज विधेयक 2025, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति तथा राष्ट्रीय सहकारिता नीति वापस ली जाए। मनरेगा (वीबी राम जी) के अंतर्गत 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित की जाए। उर्वरकों पर कम की गई सब्सिडी बहाल कर एवं यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा कालाबाजारी पर कठोर कार्रवाई की जाए। बाढ़, भूस्खलन, ओलावृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर प्रभावित किसानों, बंटाईदारों एवं कृषि मजदूरों को उचित मुआवजा दिया जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र आधारित पारदर्शी फसल एवं पशुधन बीमा व्यवस्था लागू की जाए।
किसानों, मजदूरों एवं ग्रामीण गरीबों के पुनर्वास के बिना भूमि अधिग्रहण, बेदखली एवं बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाई जाए तथा भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का सख्ती से पालन कराया जाए। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित किसी भी ऐसे मुक्त व्यापार समझौते को स्वीकार न किया जाए जिससे भारतीय कृषि, डेयरी क्षेत्र, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक खरीद व्यवस्था, एमएसपी प्रणाली तथा ग्रामीण रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो।
डेयरी क्षेत्र में विदेशी उत्पादों के अनियंत्रित आयात पर रोक लगाई जाए तथा देश के करोड़ों दुग्ध उत्पादक परिवारों के हितों की रक्षा की जाए। बीज क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एकाधिकार को रोकते हुए किसानों के पारंपरिक बीज अधिकारों एवं बीज स्वायत्तता की रक्षा की जाए। कृषि आधारित उद्योगों, प्रसंस्करण इकाइयों एवं ग्रामीण रोजगार के अवसरों का विस्तार कर युवाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
देश के प्राकृतिक संसाधनों, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक विकास पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को देखते हुए केन्द्र सरकार एक प्रभावी एवं न्यायसंगत जनसंख्या नियंत्रण कानून देश में लागू करें।
देशभर के किसान यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का आधार है।
अतः किसानों, मजदूरों और ग्रामीण भारत के हितों की रक्षा हेतु उपरोक्त मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है। हमें विश्वास है कि भारत सरकार किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इन मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करेगी। मौजूद रहे।
किसान नेता विशेष यादव प्रमुख प्रदेश महासचिव, राजीव यादव प्रदेश संगठन मंत्री
रामाकांत सिंह, भानुप्रताप सिंह, सोमप्रकाश, विवेक कुमार, संजय कुमार, रुपेन्द्र सिकरवार आदि पदाधिकारी मौजूद रहे।

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