फ़िरोज़ाबाद जनपद 5 फरबरी 1989 में स्थापित हुआ |
फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश का एक शहर एवं जिला मुख्यालय है।यह शहर चूड़ियों के निर्माण के लिये प्रसिद्ध है। यह आगरा से 40 किलोमीटर और राजधानी दिल्ली से 250 किलोमीटर की दूरी पर पूर्व की तरफ स्थित है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ यहाँ से लगभग 250 किमी पूर्व की तरफ है।
फिरोज़ाबाद में मुख्यतः चूडियों का कारोबार होता है। यहाँ पर आप रंग बिरंगी चूडियों को अपने चारों ओर देख सकते हैं। लेकिन अब यहाँ पर गैस का कारोबार होता है। यहाँ पर काँच का अन्य सामान ;जैसे काँच के झूमरद्ध भी बनते हैं।
इस शहर की आबो हवा गरम है। यहाँ की आबादी बहुत घनी है। यहाँ के ज्यादातर लोग कोरोबार से जुडे हैं। घरों के अन्दर महिलाएं भी चूडियों पर पालिश और हिल लगाकर रोजगार अर्जित कर लेती हैं। बाल मज़दूरी यहाँ आम है। सरकार तमाम प्रयासों के बावजूद उन पर अंकुश नहीं लगा सकी है।
फ़िरोज़ाबाद का पुराना नाम चंदवार बताया जाता है, उस समय चंद्रवार के राजा चन्द्रसेन हुआ करते थे जो जैन धर्म के अनुयायी थे, आज भी फ़िरोज़ाबाद के चदरवार नगर जो यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है पर राजा चन्द्रसेन का खंडहर हुआ पुराना किले के अवशेष और प्राचीन जैन मंदिर मौजूद है यहाँ पसीने वाले हनुमान जी का मदिर और एक पुराना शिव मंदिर भी है जिले का वर्तमान नाम अकबर के समय में मनसबदार फ़िरोज़शाह द्वारा 1566 में दिया गया। चंदवार ;या चंदावरद्ध में चौहान वंश के राजा चन्द्रसेन और मुहम्मद ग़ोरी के बीच 1194 ई। में युद्ध लड़ा गया जिसमें राजा चन्द्रसेन की हार हुई फ़िरोज़ाबाद का प्राचीन नाम चंदवार नगर था। फ़िरोज़ाबाद का नाम अकबर के शासन में फिरोज शाह मनसब दार द्वारा 1566 में दिया गया था। कहते हैं कि राजा टोडरमल गया से तीर्थ यात्रा कर के इस शहर के माध्यम से लौट रहे थे एतब उन्हें लुटेरो ने लूट लियाद्यउनके अनुरोध परए अकबर महान ने मनसबदार फिरोज शाह को यहा भेजा । फिरोज शाह दतौजिए रसूलपुरएमोहम्मदपुर गजमलपुर एसुखमलपुर निज़ामाबादए प्रेमपुर रैपुरा के आस.पास उतराद्यफिरोज शाह का मकबरा और कतरा पठनं के खंडहर इस तथ्य का सबूत है |
ईस्ट इंडिया कंपनी से सम्बंदित एक व्यापारी पीटर ने 9 अगस्त 1632 में यहाँ का दौरा किया और शहर को अच्छी हालत में पायाद्ययह आगरा और मथुरा की विवरणिका में लिखा है की फ़िरोज़ाबाद को एक परगना के रूप में उन्नत किया गया था । शाहजहां के शाशन में नबाब सादुल्ला को फ़िरोज़ाबाद जागीर के रूप में प्रदान किया गयाद्यजहागी ने 1605 से 1627 तक शाशन किया । इटावा, बदायूं मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद सम्राट फर्रुखसियर के प्रथम श्रेणी मनसबदार के अंतर्गत थे।
बाजीराव पेशवा ने मोहम्मद शाह के शासन में 1737 में फ़िरोज़ाबाद और एतमादपुर लूटाद्यमहावन के जाटों ने फौजदार हाकिम काजिम पर हमला किया और उसे 9 मई 1739 में मारे दियाद्यजाटों ने फ़िरोज़ाबाद पर 30 साल शासन किया।
मिर्जा नबाब खान यहाँ 1782 तक रुके थे। 18 वीं सदी के अंत में फ़िरोज़ाबाद पर मराठाओं के सहयोग के साथ हिम्मत बहादुर गुसाईं द्वारा शासन किया गया ।
फ्रेंचए आर्मी चीफ डीण् वायन ने नवंबर 1794 में एक आयुध फैक्टरी की स्थापना की थी । थॉमस ट्रविंग ने भी अपनी पुस्तक ‘Travels in India ‘ में इस तथ्य का उल्लेख किया है |
मराठाओं ने सूबेदार लकवाददस को यहां नियुक्त किया जिसने पुरानी तहसील के पास एक किले का निर्माण कराया जो वर्तमान में गाढ़ी के पास स्थित है जनरल लेक और जनरल वेल्लजल्ल्य ने 1802 में फ़िरोज़ाबाद पर आक्रमण किया, ब्रिटिश शासन की शुरुआत में फ़िरोज़ाबाद इटावा जिले में था।लेकिन कुछ समय बाद यह अलीगढ़ जिले में संलग्न किया गया । जब 1832 में सादाबाद को नया ज़िला बनाया गया तो फ़िरोज़ाबाद को इस में सम्मिलित कर दिया गया | पर बाद में 1833 में फ़िरोज़ाबाद को आगरा में सम्मिलित कर दिया गया 1847 में लाख का व्यापर यहाँ बहुत फल-फूल रहा था |
1857 के स्वतंत्रा संग्राम में चंदवार के जमींदारो ने स्थानीय मलहो के साथ सक्रिय भाग लिया । प्रसिद्ध उर्दू कवि मुनीर शिकोहाबादी को ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार ने काला पानी की सजा सुनाई थी।इस शहर के लोगो ने श्खिलाफत आंदोलनश्ए श्भारत छोड़ो आंदोलनश् और श्नमक सत्याग्रहश् में भाग लिया और राष्ट्रीय आंदोलनों के दौरान जेल गये|
1929 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ए1935 में सीमांत गांधीए१९३७ में पंडित जवाहरलाल नेहरू और १९४० में सुभाषचन्द्र बोस ने फ़िरोज़ाबाद के दौरे किये ।
सन 1862 में 1 अप्रेल को टूंडला से शिकोहाबाद के लिए पहली रेलगाड़ी चालू हुई इससे अगले वर्ष मार्च 1863 ई0 से टूंडला से अलीगढ तक चलाया गया।
