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फ़िरोज़ाबाद – जेएस यूनिवर्सिटी प्रशासन व 165 अभ्यर्थियों के खिलाफ एक और मुकददमा दर्ज


फ़िरोज़ाबाद / शिकोहाबाद – जेएस यूनिवर्सिटी की मुसीबते कम होने की बजाय दिनों दिन बढ़ती जा रही है,

ए.डी.जी जयपुर ने बताया कि जेएस यूनिवर्सिटी प्रशासन और 165 अभ्यर्थियों के खिलाफ मुकददमा दर्ज हो चुका है ? यूपी से अब तक का सबसे बड़ा घपला सामने आया है, जिसने यूपी के अलावा अन्य राज्यों की भर्ती प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिये है आरोप है कि 203 लोगों ने शिकोहाबाद की जेएस यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी डिग्री बनवाई. फिर उसे फिजिकल टीचर यानी कि पीटीआई से जुड़ी भर्ती परीक्षा में लगाकर नौकरी हथिया ली, फर्जी बीपीएड मार्कशीट का इस्तेमाल कर 202 शिक्षकों को नौकरी भी मिल गई… लेकिन जब एसओजी ने मार्कशीट को चैक किया तो 202 मार्कशीट फर्जी निकलीं. सिर्फ एक छात्र की डिग्री असली थी

एसओजी के एएसपी ने जब और गहराई तक जाने के लिए जेएस यूनिवर्सिटी के सर्वर को टटोला तो एक-एक कर पोल खुलती चली गई. यहां एक बात और आपको बतादें कि जेएस यूनिवर्सिटी को हर सेशन में सिर्फ 100 सीटों की मान्यता मिली हुई थी. लेकिन एडमीशन हजारों छात्रों के कर लिए गये थे उन्ही 2082 लोगों ने उसी यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री दिखाकर भर्ती में आवेदन कर दिया था. सवाल ये था कि मान्यता 100 सीट की थी.लेकिन इतने सारे लोग एक साथ कैसे पास हो गए. यहीं से शक की सुई घूमी और एसओजी ने पूरा डाटा खंगालना शुरू कर दिया है जांच में जो खुलासा हुआ वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है.यूनिवर्सिटी के पास पिछले कई सालों का डाटा मौजूद नही है.
पता चला है कि नौकरी हासिल करने वाले 25 लोग ऐसे थे जिन्होंने बीपीएड का कोर्स तो कहीं और से किया था, लेकिन मार्कशीट जेएस यूनिवर्सिटी की लगाई थी. 26 लोगों ने अलग-अलग सत्र की डिग्रियां लगाई जो फर्जी निकलीं. 9 लोगों ने तो हद ही कर दी, सीधे नकली मार्कशीट बनवा डाली और 43 लोगों की मार्कशीट की तारीख थी 25 सितंबर 2022 के बाद की, जबकि परीक्षा उससे पहले हो चुकी थी. मतलब, डिग्री छपी ही बाद में थी….एसओजी ने जेएस यूनिवर्सिटी की हार्ड डिस्क खंगाली. तो पता चला कि 2017-19, 2018-20, 2019-21 और 2020-22 सत्रों की 203 डिग्रियों में से सिर्फ एक छात्र कुलराज सिंह की डिग्री असली थी. बाकी सब फर्जीवाड़ा था.

अब घोटाला इतना बड़ा हो और दलाल न हों, ऐसा कैसे हो सकता है जांच में सामने आया कि दलालों ने भी जमकर खेल किया था. फर्जी मार्कशीट बनवाकर अभ्यर्थियों को बेचीं. यूनिवर्सिटी के सर्वर से फर्जी डिग्री प्रिंटिंग का बैकअप डाटा भी पकड़ा गया है, जिसमें सारा काला चिट्ठा दर्ज था.
एसओजी अब जेएस यूनिवर्सिटी प्रशासन और 165 अभ्यर्थियों के खिलाफ मुकददमा दर्ज कर चुकी है ? 37 लोग जिन्होंने डमी कैंडिडेट बिठाए या फर्जी मार्कशीट जमा की, उनके खिलाफ पहले से ही मुकददमा दर्ज है. अब देखना ये है कि इस घोटाले का अंजाम क्या होता है. क्या इन फर्जी डिग्री वालों की नौकरी जाएगी या नही वही जेएस यूनिवर्सिटी पर क्या एक्शन होगा ?

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