यूपी में कांवड़ यात्रा वाले 10 बिजी जिले, 2 बड़े रूट जहां दिन-रात चल रहे हजारों कांवड़िए।
फिरोजाबाद/मेरठः यूपी में पावन सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हो गई है. इसी के साथ ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो चुकी है. यूपी के कई जिलों में बोल बम के उद्घोष करते हुए कांवड़ियों का गुजरना शुरू हो गया है. शिवभक्ति से लबरेज इन कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा है. चलिए आपको बताते हैं कि यूपी के किन जिलों में इस वक्त बड़ी संख्या में कांवड़िए गुजर रहे हैं.

पहला व्यस्त रूटः कासगंज जिले के प्रसिद्ध सोरो तीर्थ से जल भरकर कांवड़िए एटा जिले के रास्ते फिरोजाबाद जिले से हुए जसराना, एटा रोड, शिकोहाबाद शहर और नसीरपुर रोड होते हुए आगरा के प्रसिद्ध बटेश्वरनाथ मंदिर की ओर जा रहा है. यह पैदल यात्रा करीब 100 किलोमीटर से अधिक है. बड़ी संख्या में कांवड़िए बटेश्वर तीर्थ की ओऱ बढ़ रहे हैं.
दूसरा व्यस्त रूटः ग़ाज़ियाबाद, मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर और बागपत जैसे ज़िलों से इस बार 5 करोड़ से ज्यादा शिव भक्तों के गुजरने की उम्मीद है. इसके मद्देनजर खास इंतजाम किए गए हैं. ये कांवड़िए हरिद्वार, प्रयागराज, काशी और गढ़मुक्तेश्वर से जल लेकर आ रहे हैं.

यूपी के इन जिलों से गुजर रही कांवड़ यात्रा
- कासगंज
- एटा
- मेरठ
- फिरोजाबाद
- हापुड़-गाजियाबाद
- लाल कुआं
- गाजीपुर
- बुलंदशहर
- अमरोहा
- लखनऊ
- मुरादाबाद
किस रूट की कितनी दूरी?
- कासगंज से आगरा के बटेश्वर की दूरी करीब 100 किमी से अधिक है. यहां पैदल पहुचंने में 2 से 3 दिन का समय लग जाता है.
- हरिद्वार से दिल्ली की दूरी करीब 222 किमी है. यहां से पैदल पहुंचने में 5 से 6 दिन का समय लग जाता है. यह रास्ता यूपी से होकर गुजरता है.
- प्रयागराज से दिल्ली की दूरी 697 किमी, यहां पैदल पहुंचने में करीब 15-18 दिन लग सकते हैं.
- काशी से हरिद्वार की दूरी करीब 854 किलोमीटर है, पैदल इस दूरी को पूरा करने में 20-22 दिन लग जाते हैं.
कांवड़िए जल कहां चढ़ाते हैं?: कुछ कांवड़िए हरिद्वार और प्रयागराज से जल लाकर काशी विश्वनाथ का अभिषेक करते हैं तो कुछ कांवड़िए कासगंज के सोरो तीर्थ से जल लेकर आगरा के बटेश्वर में जलाभिषेक करते हैं. इसके अलावा कुछ कांवड़िए हरिद्वार से जल ले जाकर अपने क्षेत्र के मंदिर में शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. कांवड़िए अपने संकल्प के अनुसार कांवड़ में जल लाकर अभिषेक करते हैं.
काशी से जल क्यों नहीं ले जाते कांवड़िएः कांवड़िए हरिद्वार या प्रयागराज से जल लाकर काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं लेकिन काशी का जल जलाभिषेक के लिए नहीं ले जाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि काशी के जल में कई जीवों का वास होता है. जल ले जाने से उनकी मुक्ति की मार्ग बाधित होता है. इस वजह से काशी के बाहर यह जल नहीं ले जाया जाता है. इसी वजह से कांवरिए यहां का जल नहीं ले जाते हैं. काशी के जल से बाबा विश्वनाथ का ही अभिषेक किया जाता है. काशी में बड़ी संख्या में हरिद्वार से जल लाकर जलाभिषेक करने के लिए कांवड़िए पहुंचते हैं.
कई जिलों में रूट डायवर्जनः फिरोजाबाद समेत कई जिलों में कांवड़ यात्रा के मद्देनजर रूट डायवर्जन लागू किया गया है. कासगंज जिले के प्रसिद्ध सौरों तीर्थ से जल भरकर कांवड़िए एटा जिले के रास्ते फिरोजाबाद में प्रवेश करते हैं. यहां से यह यात्रा जसराना, एटा रोड, शिकोहाबाद शहर और नसीरपुर रोड होते हुए आगरा के प्रसिद्ध बटेश्वरनाथ मंदिर तक जा रहे हैं. कुछ कांवड़िए एटा से अवागढ़, फरिहा, कोटला रोड, नारखी, पचोखरा होते हुए टूण्डला और फिर आगरा तक की यात्रा कर रहे हैं. इसके अलावा मेरठ समेत अन्य कई जिलों में भी रूट डायवर्जन लागू किया गया है.
क्यूआर कोड की भी व्यवस्थाः कांवड़ियों के रूट पर इस बार क्यूआर कोड के जरिए रूट की जानकारी दी जा रही है.सरकार की ओर से इसकी व्यवस्था की गई है. अगर कांवड़िए रास्ता भटक गए हैं तो वह रास्ते में जगह-जगह प्रदर्शित किए जा रहे क्यूआर कोड को स्कैन कर रूट की जानकारी ले सकते हैं.
